सरकारी कॉलेजों में असिस्टेंट प्रोफेसर के 4727 पद खाली हैं. करीब 27 साल बाद अब इनमें से लगभग 2709 पद भरे जाने की उम्मीद है. इसके लिए उच्च शिक्षा विभाग भर्ती से जुड़े विभिन्न विवादों पर जल्द से जल्दविराम लगाने के उद्श्य से आगे बढ़ रहा है. पोस्टिंग के लिए च्वाइस फिलिंग होने लगी है. वहीं, इन पदों पर नियकु्ति होने के बाद भी 2018 पद खाली रह जाएंगे.
भर्ती के लिए नेट, सेट सहित पीएचडी धारक उम्मीदवारों ने लंबा संघर्ष किया है. 39 विषयों के लिए पीएससी को हाईकोर्ट के निर्शदे पर दोबारा से चयन सूची जारी करनी पड़ी है. हालांकि, अभी भी रास्ता पूरी तरह से साफ नहीं है. अनारक्षित वर्ग की सीट पर आरक्षित वर्ग की उम्मीदवारों के चयन का प्रकरण हाईकोर्ट में विचाराधीन है, इसलिए इन महिलाओं को भर्ती प्रक्रिया में शामिल करने से फिलहाल रोका गया है. उधर, पीएससी से चयनित नए उम्मीदवारों का बुधवार और गुरुवार को सत्यापन किया गया है. वहीं जानकार कहते हैं कि रेगुलर ताैर पर असिस्टेंट प्रोफेसर्स को जितनी जल्दी नियकु्ति मिलेगी, उतनी ही जल्दी कॉलेजों की व्यवस्थाओं में सुधार होगा। छात्रों काे लाभ मिल सकेगा.

प्रयास…भर्ती से जुड़े विभिन्न विवादों का समाधान करने के उद्देश्य से उच्च शिक्षा विभाग कर रहा हर संभव कोशिश

उम्मीदवारों ने रैली, धरना और सोशल मीडिया पर चलाया अभियान
इस भर्ती प्रक्रिया के लिए डिग्रीधारी युवा लंबे समय से इंतजार कर रहे थे. इसके विज्ञापन निकलवाने से लेकर नियुक्ति कराने के लिए विभिन्न तरह से विरोध हुआ. पहली लिस्ट में चयनित उम्मीदवारों ने नियुक्ति के लिए भोपाल में 16 जनवरी 2019 में निवेदन यात्रा निकाली. 8 जून 2019 को सत्याग्रह किया. 1 अगस्त को धरना दिया. इसके बाद राज्यपाल, मुख्यमंत्री, उच्च शिक्षा मंत्री और प्रमुख सचिव को पोस्ट कार्ड भेजने का अभियान चलाया. इसके साथ ही सोशल मीडिया पर नियुक्ति के लिए अभियान चलाया है.

दोबारा जारी की चयन सूची
ऑनलाइन परीक्षा जून-जुलाई 2018 में हुई. पहली बार चयन सूचियां अगस्त में जारी हुईं व सत्यापन सितंबर 2018 में हुआ. असिस्टेंट प्रोफेसर की भर्ती प्रक्रिया को कई बार हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई, लेकिन विभाग ने इस दौरान सभी खामियां को दूर करने की कोशिश की. हाईकोर्ट के निर्शदे पर पीएससी ने सभी 39 विषयों की दोबारा से चयनसूची जारी कीं.

25 बार जारी किए संशोधन
उच्च शिक्षा विभाग ने 2017 में विज्ञापन जारी किया. इस पर उठाए गए सवाल और आरोपों सहित विभिन्न खामियों को दूर करने के लिए शासन ने करीब 25 बार संशोधन किए. इसमें करीब 16 शुद्धि पत्र, 9 सूचनाएं और विज्ञप्तियां जारी की गईं. हाईकोर्ट में अनारक्षित वर्ग की सीट पर आरक्षित वर्ग की महिला उम्मीदवारों के चयन का प्रकरण लंबित है.

एक्सपर्ट… भर्ती से प्रदेश की शिक्षा में हो सकेगा सुधार
रेगुलर स्टाफ बढ़ेगा. इनके पास नया ज्ञान है. इससे प्रदेश की शिक्षा में सुधार हो सकेगा. नई पीढ़ी कंप्यूटर फ्डली है, इस रें लिए इनकी वर्क स्टाइल व काम करने की क्षमता का लाभ मिल सकेगा. 100% नहीं तो 20% ही सही, लेकिन बदलाव आएगा. -डॉ. राधा बल्लभ शर्मा, पूर्व असिस्टेंट डायरेक्टर, उच्च शिक्षा विभाग

कॉलेजों और छात्रों को तीन लाभ
1.रिसर्च एंड डेवलपमेंट में मिलेगा बढ़ावा : 
इन उम्मीदवारों में नेट, सेट व पीएचडीधारक शामिल हैं. इनमें भी बड़ी संख्या में पीएचडीधारक उम्मीदवार है. इससे कॉलेजों में शोध कार्य को बढ़ावा मिलेगा. यह विभिन्न एजेंसियों के माध्यम से रिसर्च प्रोजेक्ट शुरू करा सकेंगे.

2. छात्रों को मिलेगा रेगुलर स्टाफ : पिछले 5 सालों में 129 सरकारी कॉलेज बढ़े हैं, जबकि रेगुलर टीचिंग स्टाफ की नियुक्ति पर रोक लगी रही. इस भर्ती से नए और पुराने कॉलेजों को सीधे लाभ मिलेगा. नए कॉलेजों में परमानेंट स्टॉफ मिलेगा, वहीं प्रमुख कॉलेजों से प्रोफेसर्स के डिप्लॉयमेंट की व्यवस्था पर रोक लग सकेगी. इसके कारण बड़े कॉलेजों में पढ़ाई का स्तर पहले की अपेक्षा सुधर सकेगी.

3.वर्तमान स्टाफ से कम होगा लोड : वर्तमान में पदस्थ रेगुलर टीचिंग स्टाफ शैक्षणिक सहित अन्य दीगर कार्य भी संभाल रहे हैं. रेगुलर असिस्टेंट प्रोफेसर मिलने से इस कार्य में भी बंटवारा हो सकेगा. इसके कारण यह भी पहले की अपेक्षा अधिक ध्यान से शैक्षणिक कार्य में जुट सकेंगे. यदि शिक्षकों से दीगर कार्य चुनाव ड्यूटी, विभिन्न योजनाओं के कार्य से छुटकारा मिल जाए तो इससे भी अधिक लाभ मिल सकेगा.

By JobSeva

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